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What is Plagiarism in hindi

Plagiarism क्या होता है? इससे कैसे बचा जा सकता है? (What is Plagiarism in SEO in hindi)

ब्लॉगिंग एक ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ रचनात्मक और मूल होने की अति आवश्कता है, लेकिन आज कि इस ऑनलाइन ब्लॉग की दुनिया में कई लोग ऐसे भी आते है, जिनके अंदर कुछ  रचनात्मक करने की कला नहीं होती है, बल्कि वे सिर्फ पैसे कमाने की नजर से इस काम को शुरू करते है. ऐसे लोग दूसरों के काम को कॉपी पेस्ट करके, उसे पैसे कमाने के लिए या दुसरे काम के लिए उपयोग करते है. Plagiarism का मतलब गलत तरीके से नक़ल करके अपने ब्लॉग में पोस्ट करना. लोग अपने ब्लॉग में डाटा,  इमेज,  या कुछ भी अन्य कॉपी पेस्ट कर लेते है. ब्लॉगिंग की दुनिया में डाटा, इमेज कॉपी पेस्ट करना एक आम बात है, लेकिन SEO की नजर में यह एक गहन अपराध से कम नहीं है. आज हम आपको इस आर्टिकल के द्वारा यही बताएँगे कि क्यूँ अपने ब्लॉग को कॉपी पेस्ट फ्री रखे,कैसे अपने ब्लॉग को इन कॉपी पेस्ट ब्लॉगर से बचा सकते है.

What is Plagiarism in SEO

ब्लॉगर को यह जानना इतना जरुरी नहीं है कि किसने उसके डाटा को कॉपी पेस्ट किया, उसके लिए जरुरी है कि वो अपने ब्लॉग को ऐसे चीटर से बचाए. SEO में जिस तरह से Internal Links और Outbound Links महत्त्वपूर्ण है, उसी तरह Plagiarism भी है. 

Plagiarism क्या है?

Plagiarism दूसरों द्वारा लिखे लेख या, डाटा को कॉपी करना है. किसी दुसरे लेखक के विचार, भाषा या सोच को भी कॉपी करना Plagiarism कहलाता है. यह बेईमानी है, जिसे SEO की नजर में बहुत बुरा माना जाता है. SEO की दुनिया में किसी भी आर्टिकल को Plagiarism फ्री होना चाहिए, नहीं तो उसे अच्छी रैंकिंग नहीं मिलती है.

अपने ब्लॉग को कॉपी पेस्ट होने से क्यों बचाना चाहिए

  • इसका एक तो सबसे बड़ा कारण है कि आप अपनी मेहनत का क्रेडिट किसी और नहीं देना चाहोगे. आपकी घंटों सालों की मेहनत को आप किसी और के साथ तो शेयर बिलकुल नहीं करना चाहोगे.
  • लोग आपके काम को अपने ब्लॉग में शेयर करके लाखों रूपए कम लेंगें वो भी बिना आपको क्रेडिट दिए.

Plagiarism is a two-way streetPlagiarism का असर दोनों तरफ होता है, मतलब जिसने कॉपी किया है, और जिसका कॉपी हुआ है. अगर किसी ने आपका डाटा कॉपी किया है तो सामने वाले को तो दंड मिलेगा ही, लेकिन इसका असर आपकी साईट में भी होगा. आपको भी गूगल की तरफ से दंड मिलेगा, और हो सकता है, सर्च इंजिन में आपको अच्छी रैंक न मिले, या रैंक से बाहर ही कर दिया जाये. कई केस में सामने वाला पूरी वेबसाइट भी कॉपी कर लेता है. यह सबसे ख़राब परिस्थिती है.

Plagiarism डाटा से आपकी साईट पर क्या प्रभाव पड़ता है

  • Plagiarism कैसे आपकी सर्च इंजिन रैंक को ख़राब करता है गूगल सर्च इंजिन के द्वारा साईट में ट्रैफिक आता है, वैसे तो गूगल बहुत स्मार्ट इंजिन है, वो समझ जाता किसने किसको कॉपी किया है, और कॉपी करने वाली साईट को सर्च इंजिन में रैंक नहीं देता है, लेकिन गूगल भी कई बार इसमें चूक जाता है और गूगल कॉपी करने वाली साईट को उपर रैंक दे देता है, जबकि ओरिजिनल साईट को अच्छी गूगल रैंक नहीं मिलती. ब्लॉग इससे आपके ब्लॉग में SEO भी प्रभावित होगा. वैसे अभी गूगल सर्च इंजिन की Algorithm ने अपने को और सख्त कर दिया है, जिससे अब कॉपी करने वाले की पोस्ट टॉप में आना मुश्किल है. ऐसे पोस्ट को गूगल स्पैम घोषित कर देता है, और सर्च इंजिन के इंडेक्स में भी नहीं रखता है.
  • Plagiarism डाटा से आपकी साईट की वैल्यू ख़राब होगी किसी और का डाटा कॉपी करके अपनी साईट में डालने से आपकी साईट की वैल्यू ख़राब होगी, क्यूंकि आपकी साईट में जो भी विसिटर आयेंगें उनको आपकी साईट में कुछ भी यूनिक, फ्रेश डाटा पढ़ने को नहीं मिलेगा Compare to ओरिजिनल डाटा जो आपकी साईट में है. इसके साथ ही गूगल इस तरह की साइट्स को लो कोस्ट साईट की केटेगरी में रख देता है.
  • आपके विसिटर आसानी से समझ जायेंगें कॉपी-पेस्ट करके आप ज्यादा समय तक अपनी साईट नहीं चला सकते, ये तरीका ज्यादा समय तक नहीं चलेगा. आपके दर्शकों को अंततः पता चल ही जाएगा कि आप किसी और के डाटा को पेस्ट कर रहे हैं. वो जान जायेंगें कि आपकी साईट में कुछ भी फ्रेश और क्रिएटिव नहीं है, आप दूसरों से चोरी करते है. अतः आपको SEO के इस जरुरी रूल को ब्रेक नहीं करना है.

कैसे बनाये यूनिट डाटा (Content) –

Plagiarism फ्री आर्टिकल के लिए बस आपको थोड़ी मेहनत करनी होगी, लेकिन इसका रिजल्ट आपको पॉजिटिव ही मिलेगा. आपको अपनी साईट में समय व्यतीत करना होगा, जिससे एक क्वालिटी Content तैयार हो सके. आप बाहर से भी अपनी साईट के लिए राइटर रख सकते है, Freelancer बहुत सारे ऐसे राइटर है जो ऑनलाइन काम करते है, जिनको Unique Content Writing का अच्छा ज्ञान है. पैसा और समय लगाकर आप अपनी अच्छी साईट बना सकते है. आप इन बातों का ध्यान रखें –

  • अपने राइटर और एडिटर को इस विषय के बारे में अच्छे से पूरी जानकारी दे. उन्हें पुरे निर्देश समझाएं.
  • डाटा चेक करे, और उसके सारे सोर्स को भी ध्यान से देखें.
  • सुनिश्चित करें कि जो भी लिखा गया है वो यूनिक, नया डाटा है.
  • पैसे बचाने के चक्कर में सस्ते राइटर नहीं रखें, क्यूंकि वे काम भी आपको उस तरह का बिना क्वालिटी का करके देंगें.
  • प्रोफेशनल राइटर रखें, जो SEO की सारी टर्म और कंडीशन को समझता हो, और आपको अच्छा सही डाटा लिख कर दे.
  • जिस Niche में आप काम कर रहे है, उसके विशेषज्ञ लेखक को ही आप लिखने के लिए रखें. इससे वो उस विषय में सही और अच्छी जानकारी लिखेंगें.

Plagiarism कितने तरह के होते है? (Degrees of Plagiarism)

  • Patchwritingयह किसी दूसरी साईट के डाटा को Rewrite करना है, इसमें आप अपने शब्दों को इधर-उधर कर नया डाटा बना लेते है. यह बहुत आसान और कॉमन तरीका है, जिसे आज के समय में अधिकतर राइटर अपना रहे है. अगर आपके राइटर Rewrite करने में अच्छे है तो यह Plagiarism फ्री आएगा, आप समझ भी नहीं पाओगे कि यह किसी दूसरी साईट से लिखा गया है, लेकिन यह फिर भी अनैतिक है. Patchwriting से बहुत सारी SEO प्रॉब्लम आती है, कई बार राइटर डाटा Rewrite करता है, लेकिन बिना दिमाग लगाये, उसका कोई अर्थ नहीं निकलता, फॉर्मेट में एक सामान होता है. इसे भी गूगल थोड़े समय में समझ जाता है, और उस साईट को स्पैम घोषित कर देता है.
  • Cut and Paste – कुछ लोग किसी बड़ी साईट का एक छोटा हिस्सा उठाकर उसे कॉपी पेस्ट कर लेते है, यह भी Plagiarism का हिस्सा है. वैसे कुछ डाटा का डुप्लीकेट होना स्वाभाविक भी होता है, क्यूंकि कुछ ऐसे टॉपिक होते है, जिन पर सभी राइटर सेम तरह से लिखते है. ऐसे लेख में गूगल सर्च इंजिन कुछ नहीं करता, लेकिन ज्यादा वाक्य या पैराग्राफ पूरा कॉपी होता है तो गूगल एक्शन लेता है.
  • Accidental Plagiarismप्रोफेशनल राइटर के लिखने का अपना एक अलग तरीका होता हो, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता है. कई बार वे एक सामान ही शब्द, पैटर्न उपयोग करते है. अगर राइटर एक Niche में काम कर रहा है तो यह स्वाभाविक है कि वो अपने ही डाटा को कॉपी कर लेगा, और उसे पता भी नहीं चलेगा. प्रोफेशनल राइटर भी मानव है, जिसका पिछले 50-100 आर्टिकल को याद रखना नामुमकिन है, इस तरह का कॉपी डाटा Accidental Plagiarism कहलाता है.

Plagiarism Checker tools

Plagiarism चेक करने के लिए आज ऑनलाइन मार्किट में बहुत सारे टूल मौजूद है, जिसमें से कुछ फ्री है तो कुछ आप पैसे देकर खरीद सकते है. इन टूल्स की सहायता से आप Plagiarism चेक कर सकते है.

कॉपी करने वालों के साथ क्या करें

कॉपी पेस्ट करने वाले ज्यादातर ऐसे लोग होते है, जिन्हें इसकी ज्यादा जानकारी नहीं होती है. उन्हें नहीं पता होता है कि ऑनलाइन ऐसा काम करना गलत है. अगर आपके डाटा को भी किसी ने कॉपी किया है तो ज्यादा आक्रामक न हों. आप उसकी साईट में जाकर उसकी कांटेक्ट इनफार्मेशन ईमेल आईडी या फ़ोन नंबर निकालें. आप उसे मेल में इसकी जानकारी दे, और उसे वो आर्टिकल डिलीट करने को बोले. अगर आपको रिस्पोंस नहीं मिलता है तो आप फिर कोई रास्ता चुने.

  • कांटेक्ट गूगल अगर सामने वाला आपके आर्टिकल से पैसे कमा रहा है तो आप गूगल को इस विषय की जानकारी दे सकते है.
  • कांटेक्ट वेबहोस्ट आप साईट की वेब होस्टिंग कंपनी से भी कांटेक्ट कर सकते है और उन्हें बता सकते है कि इस साईट के द्वारा अवैध काम किया गया है. वेबहोस्ट कंपनी इसकी जांच करेगा, और अगर आपके द्वारा कही बात सही होती है तो उस पूरी साईट के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.
  • एडवरटाइजिंग कंपनी से कांटेक्ट करें इन्टरनेट में बहुत सी एडवरटाइजिंग उपलब्ध है, अधिकतर अवैध काम के प्रति कड़ी कार्यवाही करती है. Adsense, Mediaburst जैसी बड़ी एडवरटाइजिंग कंपनी Plagiarism के खिलाफ सख्त कार्यवाही करती है. आप इनको मेल के द्वारा इसकी सारी जानकारी देकर कुछ समय इंतजार करे, एक्शन जरुर लिया जायेगा.

किसी का डाटा कॉपी करने का मतलब ब्लॉगिंग नहीं होता है, किसी और की मेहनत का फल खाने से आप अच्छे ब्लॉगर नहीं कहलाते है. अगर कभी आपको अपने ब्लॉग में कुछ डाटा कॉपी करने की भी आवश्कता हो तो, पहले उस राइटर या साईट के मालिक से परमिशन लें और वे आपको हाँ बोलते है तो आप वो डाटा अपनी साईट में कॉपी करें, इसके साथ ही आपको लेखक को उसका क्रेडिट जरुर देना चाहिए. इससे आपके ब्लॉग की वैल्यू बढ़ेगी. Backlink बनाते समय भी आप ध्यान रखें की आप किसी और का या अपना भी कोई डाटा कॉपी करके लिंक नहीं बनाये. यह भी अनैतिक है. 

हमें आशा है कि Plagiarism से जुडी हमने सारी जानकरी आपको दी है, इसे अपना कर आप अपने ब्लॉग को और अच्छा कर सकते है. Plagiarism से जुड़े आप अपने अनुभव हमारे साथ शेयर करें. 

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